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बुधवार, 31 अक्तूबर 2018

जीवन क्रिकेट है।

 Life is cricket
पिक क्रेडिट - pixabay

जीवन क्रिकेट है,
'इनिंग्स' का अर्थ जीवन है।
'पिच' हमारी कर्मभूमि है।
'कमेंटेटर' हमारे जीवन का सूत्रधार है।
'एम्पायर' भाग्य का विधाता है।
विपक्षी कप्तान यमराज है,
तो 'बॉलर' यमदूत है।
छक्का मरने का अर्थ सफलता प्राप्त करना है।
'आउट' होने का अर्थ मृत्यु को प्राप्त होना है।
जहाँ 'बोल्ड' होने का अर्थ,
प्राण-पखेरू उड़ जाना है।
वहां 'रन आउट' होने का अर्थ,
दुर्घटना का शिकार हो जाना है।
और 'कैच आउट' होने का अर्थ है,
वीर गति को प्राप्त होना।
जबकि 'हिट विकेट' होने का अर्थ है,
आत्महत्या करना।
जीवन क्रिकेट है,
विजय और पराजय, सुख और दुःख है।

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सोमवार, 22 अक्तूबर 2018

कलयुगी पिता पुत्र संवाद।


Father son conversation
पिक क्रेडिट - pixabay

पिता ने पुत्र के चरण स्पर्श किया,
और कहा - क्या आज्ञा  है मेरे लिए,
पुत्र ने कहा - हे चिरंजीव बाप,
उससे पहले की आपसे शुरू करूं वार्तालाप,
एक बीड़ी पिलवाईए, पांव जरा धीरे दबाइये,
माँ के नहीं मेरे पांव है,
पिता ने पुत्र की बीड़ी सुलगाई,
खुद भी खेंच के ऐसी दम लगाई,
की बीड़ी के प्राण पखेरू उड़ गये,
बेटे के होंठ मारे गुस्से के सिकुड़ गये,
बाप से बोला - बदतमीज ,
तूं बाप है या फजीता है,
बेटे के सामने बीड़ी पीता है,
अबे जोरू के गुलाम,
यूँ ही रोशन करेगा बेटे का नाम,
क्या जमाना आ गया है,
बाप, बेटे के सामने बीड़ी पिये,
शर्मदार बेटा कैसे जिये,
बेटा पिये तो कोई बात नहीं,
दमें का मरीज है,
ये भी कोई बाप के पिने की चीज है,
क्यों बे, कलयुग का प्रभाव तुझ पर भी पड़ गया,
मोहल्ले के आवारा बापों में रहकर बहुत बिगड़ गया,
हर हसीन बुढिया से इश्क लड़ाता है,
रिडक्शन का माल बहुत भाता है,
अब यदि किसी बुढिया को प्रेमपत्र लिखा,
मोहल्ले के आवारा बापों के साथ दिखा,
तो ऐसा टॉर्चर पहुंचाऊंगा,
तेरी हर प्रेमिका से, मैं खुद इश्क लड़ाऊंगा,
अबे माठू कैसा सीधा साधा बनके बैठा है,
जैसे कुछ जानता ही नहीं,
घर गृहस्थी का सबक याद किया,
या माँ को बुलाऊं,
माँ भी क्या करेगी?
ये मास्टर जी भी हराम की खाते हैं,
इन बापों को जाने कैसा पढाते हैं,
हम भी सोचते हैं हटाओ,
रोज-रोज कौन धमकाये,
ले दे के एक ही बाप है,
खेलने खाने के दिन है, खाये
मगर बेटे की मर्यादा तो निभाए,
हद हो गई हमारी नर्मी की,
आटा घोलकर पिये जा रहे हैं,
मगर बच्चों को जन्म दिये जा रहे हैं,
मन्दिर में सोते हैं,
राम जाने इनको बच्चे कैसे होते हैं?
बोलो तो डांटता है चुप रहो,
बच्चों का जन्मदाता तो भगवान है,
इसमें हमारा क्या योगदान है,
ये बोल-बोलकर घर भर दिया,
अपने साथ भगवान का चरित्र भी खराब कर दिया,
वह तो अच्छा हुआ,
पहला इश्क कामयाब नहीं हुआ,
सीन कुछ दिन बाद ड्राप होता,
तो आधे हिंदुस्तान का बाप होता,
सुबह शाम खाते हैं, झिड़की,
मगर जब भी खुलती है सामने वाली खिड़की,
जरुर देखते हैं,
मेरा यार छुप-छुपकर ऐसी मस्करी करेगा,
हाजी मस्तान भी क्या तस्करी करेगा,
रोज सब्जी लेने जाते हैं,
और एक बच्चे को बेचकर आते हैं,
महंगाई का ये हाल है,
उस पर ये कमाल है,
आजकल कविता करते हैं,
नायिका के नख-शिख के वर्णन पर आंहे भरते हैं,
कहते है- हे कोमलकांत पदावली,
तेरे सारे पुर्जे मिल गये, मगर कमर नहीं मिली,
खुद लापता है मगर कमर की तलाश है,
आजकल का बाप भी कितना बदमाश है,
अबे सावन के अंधे,
यथार्थ के धरातल पर आ,
फिर कल्पना की वादियों में जा लेटा,
बाप ने कहा बेटा,
इस इक्कीसवीं सदी की नालायक सभ्यता का त्रास हूँ,
दुर्भाग्य से तू मेरा बेटा,
और सौभाग्य से मैं तेरा बाप हूँ,
अतीत हमेशां वर्तमान से हारा है,
शेख मुजीब को हमेशा उसके बेटों ने मारा है।


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गुरुवार, 18 अक्तूबर 2018

एक भारतीय की महबूबा

एक भारतीय की महबूबा
पिक क्रेडिट - pixabay
ओ मेरी महबूबा तुम्हारे नापाक इरादों
जमाखोर वायदों बेईमान निगाहों
और तस्करी अदाओं ने मेरा बजट बिगड़ दिया 
मेरा घर उजाड़ दिया।

खूबसूरती का ठेका लेकर
हजारों दिलों का कर लिया गबन 
प्यार का पुल 
कमजोर बुनियादों पर खड़ा करके
हँस रही हो जानेमन।

दुकान के आगे बढाये गये शौकेस- सा
अपना घुंघट हटा लो अवैध कब्जा करने की प्रवृति सी
अपनी अंगड़ाई सम्भालो।

भाव तुम बढ़ाती रही, नखरीली शान से 
मुनाफा कमाती रही इस गरीब इंसान से,
बैठा हूँ लुटा हुआ 
तुम्हारी मिलावटी मुस्कान से।

अपने उपभोक्ता को मरने से बचा लो,
आज तो होटों पर रेट लिस्ट लगा लो।

===*===*===अंतर्जाल से साभार===*===*===

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यमराज का जन्मदिन

यमराज का जन्मदिन
पिक क्रेडिट - pixabay

भगवान यमराज के जन्मदिन पर
लगा हुआ था दरबार
मृत्युलोक से आई हुई तीन आत्माएं
कर रही थी भाग्य निर्णय का इंतजार
एक सेठ, एक जौहरी और एक चोर
यमराज प्रभु मुखातिब हुए चित्रगुप्त की ओर
आज ख़ुशी का दिन है गुप्त जी
सबकी इच्छा पूर्ण करेंगे 
पापी हो, अपराधी हो, या धर्मात्मा
जो मांगेगा वो ही उसको देंगे।

सेठ ने कहा,
"यमराज मैं दस लाख की सम्पति छोडकर आया हूँ,
पुनर्जन्म में इससे दस गुनी मिल जाये
तो मैं करोडपति हो जाऊं।"
"तथास्तु " कह कर प्रभु ने दृष्टी घुमायी
अब जौहरी की बारी आयी 

"मैं अधिक नहीं चाहता श्रीमान,
हीरा-मोती जवाहरात से भरी हुई 
मिल जाये वही पुराणी दुकान।"
"तथास्तु" बोलकर अंत में चोर से
"तु क्या चाहता है? वत्स।"

"मैं कुछ नहीं चाहता प्रभु ,
बस इतनी कृपा कीजिए 
मुझे इन दोनों के पूरे पते बता दीजिए।"

===*===*===अंतर्जाल से साभार ===*===*===

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बुधवार, 17 अक्तूबर 2018

यमराज और नारद जी

यमराज और नारद जी - हास्य कविता
पिक्चर क्रेडिट -  pixabay


गौर कीजिए 

नारद जी ने
यमराज से पूछा -
जग में असंख्य मौतें होती है
क्या उनके परिजनों की चीत्कार से
आपका दिल नहीं दहलता
जब लोग फूट-फूट कर रोते हैं,
तब आप चैन से कैसे सोते हैं?
क्या आपका घर संवेदना प्रूफ है?

यमराज ने हंसकर कहा -
नारदजी! लगता है 
आपकी अक्ल ने भांग खाई है,
मेरा महल 
उसी कारीगर ने बनाया है
जिसमे भारत की संसद बनायीं है।

शुक्रवार, 27 सितंबर 2013

आशिक ने कहा माशुका से

आशिक ने कहा माशुका से
 
 आशिक ने कहा माशुका से
‘‘तुम अपनी फरमाईशें कम किया करो
अब बढ़ गयी है मंदी और महंगाई,
एक जगह से क्लर्क पद से छंटनी हुई
दूसरी जगह बन गया हूं चपरासी
घट गयी हैं मेरी कमाई,
इस तरह मेरा कबाड़ा हो जायेगा,
देता हूं तुम्हें ऑटो का जो किराया
पेट्रोल के बढ़ते भाव से
उसका भी महंगा भाड़ा हो जायेगा,
मुझ पर कुछ पर तरस खाओ,
अपने इश्क की फीस तुम घटाओ।’’